स्थानीय नरगिर आश्रम, गढ़वा में रामकथा अमृतवर्षा का चौथा दिवस

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गढ़वा के नरगिर आश्रम में चल रही रामकथा अमृतवर्षा के चौथे दिन कथावाचक बालस्वामी प्रपन्नाचार्य जी ने भगवान श्रीराम और उनके भाइयों के नामकरण एवं बाल लीलाओं का मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से सुंदर चित्रण प्रस्तुत किया।

उन्होंने बताया कि महाराज दशरथ के घर चार पुत्रों का जन्म हुआ, जिसके उपलक्ष्य में वशिष्ठ मुनि को नामकरण संस्कार के लिए आमंत्रित किया गया। जैसे ही वशिष्ठ मुनि ने पहले बालक को देखा, उनके मुख से स्वतः “राम” नाम प्रकट हुआ। ऐसा प्रतीत हुआ मानो यह नाम उन्होंने चुना नहीं, बल्कि स्वयं उनकी जिह्वा पर प्रकट हुआ हो।

भगवान श्रीराम के नामों का गूढ़ अर्थ

राम शब्द का अर्थ सर्वोत्तम आनंद होता है, और भगवान श्रीराम अपने संपूर्ण जीवनकाल में सबको आनंद प्रदान करते रहे।

भरत का अर्थ है विश्व का भरण-पोषण करने वाला।

लक्ष्मण का अर्थ है जिसके पास लक्ष्मी अथवा सेवा रूपी धन हो। लक्ष्मण जी सदैव श्रीराम के साथ रहकर उनकी सेवा करते रहे।

शत्रुघ्न का अर्थ है अपने शत्रुओं का हनन करने वाला।

भगवान प्रेम के भूखे होते हैं
प्रपन्नाचार्य जी ने कहा कि भगवान को न तो धन से, न ज्ञान से और न ही बल से जीता जा सकता है। वे सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान और सर्वव्यापी हैं। उन्हें केवल प्रेम भाव से ही पाया जा सकता है, क्योंकि भगवान प्रेम के भूखे होते हैं।

कौशल्या माता को हुआ श्रीराम के विराट रूप का दर्शन
कथा के दौरान उन्होंने माता कौशल्या की एक लीला का वर्णन किया। एक दिन माता कौशल्या ने बालक राम को स्नान कराया और तत्पश्चात अपने इष्टदेव की पूजा-अर्चना करके कुलदेवता को छप्पन भोग अर्पित किया। इसके बाद जब वे रसोई में गईं, तो उन्होंने देखा कि श्रीराम वहां बैठकर भोजन कर रहे हैं। यह देखकर वे अचंभित रह गईं और भयभीत होकर तुरंत पालने के पास गईं। वहां उन्होंने देखा कि श्रीराम तो पालने में सो रहे थे!

इस चमत्कार से माता कौशल्या आश्चर्यचकित रह गईं और सोच में पड़ गईं कि उनका पुत्र एक ही समय में दो स्थानों पर कैसे हो सकता है। तभी बालक राम ने उन्हें अपना विराट स्वरूप दिखाया। माता कौशल्या ने देखा कि उनके शरीर के रोम-रोम में असंख्य ब्रह्मांड समाहित हैं, जिनमें अनगिनत चंद्रमा, शिव, ब्रह्मा, पर्वत, नदियां, समुद्र और भवन भी सम्मिलित हैं।

भक्ति भाव से सराबोर हुआ गढ़ देवी मोहल्ला
इस अवसर पर गढ़ देवी मोहल्ले में भक्ति का वातावरण और प्रबल हो गया। आयोजन समिति के अध्यक्ष चंदन जायसवाल ने कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम को सफल बनाने में जगजीवन बघेल, दीनानाथ बघेल, जयशंकर बघेल, गुड्डू हरि, विकास ठाकुर, भरत केशरी, दिलीप पाठक, गौतम शर्मा, धर्मनाथ झा, अजय राम, गौतम चंद्रवंशी, सोनू बघेल, पवन बघेल, आशीष बघेल, सुमित लाल, अजय सिंह, राकेश चंद्रा, सूरज सिंह, शांतनु केशरी, शुभम चंद्रवंशी, सोनू, सुन्दरम्, शिवा आदि कार्यकर्ताओं का विशेष योगदान रहा।

संजय कुमार यादव
Author: संजय कुमार यादव

संवाददाता

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