गढ़वा स्थानीय जीएन कान्वेंट स्कूल में होली त्यौहार को मद्देनजर रखते हुए एक गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें छात्र-छात्राओं एवं शिक्षक शिक्षिकाओं
को संबोधित करते हुए स्कूल के निदेशक सह शिक्षाविद मदन केशरी ने कहा कि भारत में मनाए जाने वाले त्योहारों में होली का विशेष स्थान है। इसे भारत में रंगों का त्यौहार या उल्लास का त्यौहार कहा जाता है। यह हमारे सनातन परंपराओं का सूचक है। यह न केवल रंगों और उल्लास का पर्व है बल्कि सामाजिक समरसता, प्रेम, भाईचारे, और बुराई पर अच्छाई की जीत का भी प्रतीक है।होली का यह पर्व न सिर्फ पूरे भारत में बल्कि विश्व के कई अन्य देशों में भी धूमधाम से मनाया जाने वाला त्यौहार है। होली केवल रंगों का खेल नहीं बल्कि सामाजिक बंधनों को मजबूत करने का भी पर्व है।इस दिन लोग पुराने गिले शिकवे भुला कर एक दूसरे को गले लगाते हैं।मिठाई बांटते हैं और खुशी मनाते हैं। जाति,धर्म, वर्ग,अमीरी, गरीबी जैसी दीवारें टूट जाती है और हर कोई समान रूप से इस त्यौहार का आनंद लेते हैं। उन्होंने बच्चों को सम्बोधित करते हुए पटाखों से परहेज रखने या सावधानीपूर्वक बड़ो के देख रेख में जलाने की बात कही।पटाखों ने कई घरों और जिंदगियों को तबाह कर दिया है।यह पर्यावरण का दुश्मन है। यह हमारे पर्यावरण को दूषित और विषाक्त करता है। वर्तमान में गढ़वा जिला के गोदरमाना में पटाखों से मरने वालों के प्रति संवेदना व्यक्त की गई।
शुभकामनाएं एवं बधाई के साथ गोष्ठी का समापन किया गया। इस अवसर पर मंच का संचालन उप
प्राचार्य बसंत ठाकुर ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन वरिष्ठ शिक्षक संतोष प्रसाद ने किया। इस अवसर पर खुर्शीद आलम, वीरेंद्र शाह, कृष्ण कुमार,विकास कुमार,नीराशर्मा, सरिता दुबे, सुनीता कुमारी,नीलम कुमारी, ज्योति तिवारी, पूजा प्रकाश, रागिनी कुमारी, शिवानी कुमारी, ऋषभ श्रीवास्तव आदि शिक्षक उपस्थित रहे।
Author: संजय कुमार यादव
संवाददाता










