गढ़देवी मोहल्ला स्थित नरगिर आश्रम में रामकथा के छठे दिन उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब

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गढ़देवी मोहल्ला स्थित नरगिर आश्रम में चल रही रामकथा के छठे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कथा स्थल पर पंडाल छोटा पड़ गया, विशेष रूप से महिलाओं की उपस्थिति अधिक रही।

कथावाचक बालस्वामी प्रपन्नाचार्य जी ने इस दिन की कथा में कैकई द्वारा महाराज दशरथ से वर मांगने, राम वन गमन, केवट प्रसंग और भरत मिलाप का अत्यंत रोचक और भावपूर्ण वर्णन किया। बीच-बीच में कथा प्रसंगों से जुड़े मधुर भजनों की प्रस्तुति से कथा और अधिक आनंददायक हो गई।

प्रपन्नाचार्य जी ने कहा कि जिन परिवारों में अयोध्या कांड के मंगलाचरण की आठ चौपाइयाँ प्रतिदिन गाई, सुनी और आचरण में लाई जाती हैं, उन घरों से दरिद्रता दूर हो जाती है और सुख, समृद्धि तथा शांति का वास होता है। उन्होंने बताया कि जब से श्रीराम विवाह करके अयोध्या आए, तभी से समस्त आनंद अयोध्या नगरी में छा गया। प्रभु के विवाह में जो उत्साह और उल्लास था, उसे सरस्वती और शेषनाग भी शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकते।

कथा में आगे बताया गया कि कैकई ने राजा दशरथ से पूर्व में दिए गए दो वरदानों की मांग की—भरत को राजगद्दी और राम को 14 वर्षों का वनवास। राजा दशरथ ने उन्हें अन्य कोई वरदान मांगने को कहा, लेकिन कैकई अपने दोनों वरों पर अड़ी रहीं। रघुकुल की मर्यादा का पालन करते हुए राजा दशरथ को वह वचन निभाना पड़ा। श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के वनगमन के बाद राजा दशरथ ने प्राण त्याग दिए।

प्रपन्नाचार्य जी ने भरत चरित्र को अयोध्या कांड का प्रधान अंग बताया। उन्होंने कहा कि आज जहां स्वार्थ के कारण भाई-भाई में बैर हो रहा है, वहीं भरत चरित्र त्याग, संयम, धैर्य और ईश्वर प्रेम का अनुपम उदाहरण है। भरत का जीवन भक्तिभाव और भ्रातृप्रेम का दुर्लभ स्वरूप है, जिससे सच्चे भाईचारे की प्रेरणा मिलती है।

केवट प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि केवट, जो एक मल्लाह था, प्रभु श्रीराम को पहचानकर उन्हें अपनी नाव में बैठाकर गंगा पार कराता है—बिना किसी शुल्क के। उसकी भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर प्रभु उसे आशीर्वाद देते हैं। यह प्रसंग भक्ति, प्रेम और समर्पण का प्रतीक है, जिसमें केवट न केवल स्वयं बल्कि अपने पूरे परिवार को भगवान के दर्शन और कृपा से भवसागर पार करवा देता है।

प्रपन्नाचार्य जी ने कहा कि भगवान श्रीराम ने कभी जात-पात का भेदभाव नहीं किया। केवट और शबरी प्रसंग इसके प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि भगवान के ‘नाम’ का महत्व भगवान से भी अधिक होता है। सच्ची भक्ति, मन की सरलता और निर्मलता से भगवान को पाया जा सकता है। भक्त ‘नाम’ जप के माध्यम से भगवान को भी वश में कर लेते हैं।

रामनवमी के दिन हवन और भंडारा
आयोजन समिति के अध्यक्ष चन्दन जायसवाल ने बताया कि रामनवमी के दिन प्रातः 7 बजे से हवन तथा उसके बाद भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें सभी श्रद्धालु सादर आमंत्रित हैं।

कार्यक्रम को सफल बनाने में इन लोगों का रहा योगदान
कार्यक्रम को सफल बनाने में जगजीवन बघेल, दीनानाथ बघेल, जयशंकर बघेल, गुड्डू हरि, विकास ठाकुर, भरत केशरी, गौतम शर्मा, धर्मनाथ झा, अजय राम, गौतम चंद्रवंशी, सोनू बघेल, पवन बघेल, आशीष बघेल, सुमित लाल, अजय सिंह, राकेश चंद्रा, सूरज सिंह, शांतनु केशरी, शुभम चंद्रवंशी, सोनू, सुंदरम्, शिवा आदि का विशेष सहयोग रहा।


 

संजय कुमार यादव
Author: संजय कुमार यादव

संवाददाता

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