गढ़वा: भंडारिया निवासी 22 वर्षीय अंगद राम की जान समय पर सही इलाज मिलने से बच गई। दस दिनों से बुखार से पीड़ित अंगद का गांव में ही इलाज किया जा रहा था। स्थानीय स्तर पर मियादी बुखार की आशंका जताई गई थी और कुछ इंजेक्शन दिए जा रहे थे। लेकिन अचानक एक दिन अंगद के पेट में अत्यधिक दर्द शुरू हुआ, पेट फूलने लगा और गैस का निकलना बंद हो गया।
गंभीर स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों ने उसे तत्काल परमेश्वरी हॉस्पिटल, गढ़वा ले जाने की सलाह दी। जहां आईसीयू में भर्ती कर उसकी स्थिति की गहन जांच की गई। जिले के वरिष्ठ सर्जन डॉ. निशांत ने जांच के बाद बताया कि अंगद की खाने की नली में छिद्र हो गया था, जिससे शरीर में संक्रमण फैल गया था। डॉ. निशांत और डॉ. नीतू की टीम ने तत्काल इमरजेंसी ऑपरेशन कर युवक की जान बचाई।
ऑपरेशन के बाद मरीज को आईसीयू में ही रखा गया और पांच दिनों तक चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया। धीरे-धीरे अंगद की स्थिति में सुधार हुआ और अब, दसवें दिन, वह स्वस्थ होकर घर लौट चुका है।
डॉ. निशांत ने बताया कि इस तरह की स्थिति में देरी जानलेवा साबित हो सकती है। जब खाने की नली में छिद्र हो जाए, तो तत्काल ऑपरेशन आवश्यक होता है। उन्होंने आम जनता से अपील की कि किसी भी बीमारी को हल्के में न लें और अनुभवहीन व्यक्तियों से इलाज कराने के बजाय योग्य चिकित्सक से परामर्श लें। “नीम हकीम खतरे जान” वाली कहावत अक्सर सच साबित होती है।
गौरतलब है कि डॉ. निशांत जिले के एकमात्र लैप्रोस्कोपिक सर्जन हैं, जो ऐसे जटिल एवं गंभीर ऑपरेशन में दक्ष हैं। उनका यह प्रयास एक बार फिर साबित करता है कि सही समय पर लिया गया निर्णय किसी की जान बचा सकता है।
Author: संजय कुमार यादव
संवाददाता










