गढ़वा बिश्रामपुर विधानसभा के कांग्रेस प्रत्याशी सुधीर कुमार चंद्रवंशी ने उर्वरक की कालाबाज़ारी पर केंद्र सरकार और प्रशासन को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि किसानों के हितों की रक्षा के नाम पर बनाई गई योजनाएँ ज़मीनी स्तर पर पूरी तरह असफल साबित हो रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार का स्पष्ट नियम है कि किसी भी वस्तु को उसके प्रिंट रेट से अधिक बेचना अपराध है, तो फिर यूरिया और डीएपी खाद की कालाबाज़ारी पूरे देश में खुलेआम क्यों हो रही है।
खड़ी फसलें सूख रहीं, किसान परेशान
सुधीर चंद्रवंशी ने कहा कि आज खेतों में खड़ी-खड़ी फसलें सूख रही हैं, लेकिन सरकार किसानों की मदद के लिए सामने खड़ी नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा,
“किसान का हितैषी अगर बनना है तो उनके दुख में सामने खड़ा रहना होगा। सब खड़ी-खड़ी फसल मर रही है, और अगर अभी सरकार ने समुचित समाधान नहीं किया तो कल जब अकाल पड़ेगा, तब क्या आप घर-घर जाकर 5 किलो चावल बाँटकर अपनी जिम्मेदारी पूरी करेंगे?”
उन्होंने कहा कि किसानों को अभी अगर सरकार से समर्थन नहीं मिला तो आगे चुनाव के समय सरकार उन्हीं किसानों से वोट मांगने किस मुंह से जाएगी।
प्रिंट रेट और ज़मीनी हकीकत में भारी अंतर
चंद्रवंशी ने बताया कि यूरिया का सरकारी मूल्य 266 रुपये प्रति बोरी है, लेकिन किसानों को इसे 500 से 1000 रुपये तक में खरीदना पड़ रहा है। वहीं डीएपी, जिसकी कीमत 1350 रुपये तय है, उसे 1800 रुपये तक बेचा जा रहा है। किसानों की शिकायतों की पुष्टि के लिए उनकी टीम ने दर्जनों प्रखंडों का दौरा किया, जहाँ यह तथ्य सामने आया कि एजेंसियाँ खुद ही दुकानदारों को महंगे दाम पर खाद दे रही हैं।
एजेंसियाँ 266 रुपये वाली यूरिया को 300 से 330 रुपये तक में और 1350 रुपये वाली डीएपी को 1600 रुपये में उपलब्ध कराती हैं। इसके साथ ही दुकानदारों पर नैनो यूरिया और जिंक जैसे घटिया खाद जबरन खरीदने का दबाव बनाया जाता है। शिकायत करने वालों को लाइसेंस रद्द करने और सप्लाई रोकने की धमकी दी जाती है।
भ्रष्टाचार की परतें और प्रशासन की मिलीभगत
एक दुकानदार ने एजेंसी पुरुषोत्तम प्रसाद अग्रवाल का बिल दिखाकर दावा किया कि यूरिया का बिल 247 रुपये में तैयार होता है, लेकिन उससे 330 रुपये वसूले जाते हैं। इसी तरह डीएपी का बिल 1270 रुपये का बनाया जाता है, जबकि वसूली 1600 रुपये में होती है। चंद्रवंशी ने कहा कि यह सब अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है।
उन्होंने यह भी खुलासा किया कि 6 अगस्त को जिले में खाद का जो रैक आया था, उसमें भी करोड़ों रुपये का घोटाला हुआ। किसानों तक खाद पहुँचने के बजाय उसकी कालाबाज़ारी कर दी गई। अगर इसकी उच्चस्तरीय जाँच उपभोक्ता नंबर और बैंक अकाउंट के आधार पर हो तो कई अधिकारियों और एजेंसियों की भूमिका उजागर हो सकती है।
किसान परेशान, अर्थव्यवस्था पर संकट
चंद्रवंशी ने कहा कि किसानों को समय पर खाद नहीं मिलने से केवल कृषि ही नहीं बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था खराब हो रही है। उन्होंने सरकार को चेताया कि अगर त्वरित कार्रवाई नहीं की गई तो इसका असर सीधा देश की खाद्य सुरक्षा पर पड़ेगा।
“समाधान के लिए त्वरित कार्रवाई करनी होगी। अन्नदाता का शोषण रोकना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। अगर किसान कमजोर होंगे तो आने वाले समय में देश खाद्यान्न संकट से जूझेगा।” हमारे सभी सम्मानित दल के लोगों से अनुरोध करता हूं किसानों को ऐसे विकट परिस्थिति में साथ दे और गलत लोगों के विरोध में खड़ा हो जाए आए हम सब मिलकर हमारे भाई किसानों के कदम से कदम मिलाकर चले
Author: संजय कुमार यादव
संवाददाता










