रामबांध तालाब: प्रशासन की खानापूर्ति पर जनता की नाराज़गी, ज्योति प्रकाश बोले जिम्मेदारी पूरी ली जाए, टूटा गेट भी हादसे को न्योता दे रहा है

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गढ़वा: शहर के बीचोंबीच स्थित ऐतिहासिक रामबांध तालाब इस बार भी केवल खानापूर्ति की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। जनप्रतिनिधियों की पुरजोर मांग और “कॉफी विद एसडीएम” कार्यक्रम में एसडीओ संजय कुमार द्वारा संज्ञान लेने के बाद तालाब की सफाई का काम शुरू किया गया, लेकिन सफाई केवल उसी हिस्से तक सीमित है जहां दुर्गा पूजा विसर्जन होना है। तालाब का बाकी हिस्सा गंदगी और जर्जर हालत में जस का तस पड़ा हुआ है।

इस आधे-अधूरे काम पर व्यवसायी और समाजसेवी ज्योति प्रकाश ने तीखी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा,
“पूरा तालाब जर्जर है, गेट टूटा हुआ है। दुर्गा पूजा विसर्जन में हजारों की भीड़ जुटती है। ऐसे हालात में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। प्रशासन सिर्फ दिखावा कर रहा है और स्थायी समाधान से बच रहा है।”

स्थानीय लोगों का कहना है कि ज्योति प्रकाश ने उनकी ही चिंता को आवाज़ दी है। लोगों का आरोप है कि हर साल तालाब की हालत को लेकर बातें होती हैं, लेकिन काम केवल विसर्जन तक सीमित रह जाता है।

गौरतलब है कि 6 फरवरी 2013 को तत्कालीन नगर परिषद अध्यक्ष अनिता दत्त और उपाध्यक्ष अलखनाथ पांडेय ने रामबांध तालाब और उसके आसपास के पार्क के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण का शिलान्यास किया था। 24 लाख रुपये की लागत से बनने वाले इस प्रोजेक्ट में फूलों का पार्क और बोटिंग जैसी योजनाएँ शामिल थीं। उस समय कहा गया था कि यह तालाब गढ़वा की पहचान बनेगा।

लेकिन बारह साल बाद भी यह सपना अधूरा है। न पार्क विकसित हुआ, न बोटिंग शुरू हुई और न ही तालाब की स्थायी मरम्मत हो पाई। आज की स्थिति यह है कि तालाब उपेक्षा और गंदगी का अड्डा बन चुका है।

ज्योति प्रकाश का कहना है कि यह केवल तालाब की सुंदरता का सवाल नहीं है, बल्कि गढ़वा की सांस्कृतिक धरोहर और जनता की सुरक्षा का प्रश्न है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि खानापूर्ति छोड़कर तालाब का स्थायी जीर्णोद्धार किया जाए, ताकि विसर्जन के समय किसी अनहोनी की आशंका न रहे और यह स्थल गढ़वा की पहचान बन सके।

संजय कुमार यादव
Author: संजय कुमार यादव

संवाददाता

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