मद्रास हाई कोर्ट ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 46(4) और अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 43(5) की पुनर्व्याख्या करते हुए कहा है कि मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति के बिना सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले किसी महिला को गिरफ्तार करना कानून का उल्लंघन है, लेकिन यह स्वतः अवैध नहीं होगा।
न्यायालय का निर्णय और संदर्भ
मद्रास हाई कोर्ट की खंडपीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जी. आर. स्वामीनाथन और न्यायमूर्ति एम. जोतिरमण शामिल थे, ने दीपा बनाम एस. विजयलक्ष्मी (W. A (MD) संख्या 1155/2020, 1200 और 1216/2019) में सुनवाई करते हुए यह निर्णय दिया।
यह मामला एस. विजयलक्ष्मी की याचिका से संबंधित था, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें 14 जनवरी 2019 को रात 8:00 बजे मदुरै के थीलागर थीडल पुलिस स्टेशन के अधिकारियों द्वारा अवैध रूप से गिरफ्तार किया गया था। विजयलक्ष्मी का दावा था कि गिरफ्तारी के दौरान उनके साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की गई, साथ ही हिरासत में चाकू से घायल भी किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी गिरफ्तारी मधु पौड़ीयन नामक व्यक्ति के इशारे पर हुई, जिसके साथ उनके पति का संपत्ति विवाद था।
एकल न्यायाधीश ने विजयलक्ष्मी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए थे और सरकार को 50,000 रुपये मुआवजे के रूप में देने का निर्देश दिया, जिसे अधिकारियों के वेतन से वसूला जाना था।
हाई कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां
- अपील की स्थिरता:
हाई कोर्ट ने माना कि यह मामला न्यायिक क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आता है क्योंकि याचिकाकर्ता कोई आपराधिक राहत नहीं, बल्कि अनुशासनात्मक कार्रवाई और मुआवजा मांग रहा था, जो नागरिक कानून के उपाय हैं। - महिलाओं की गिरफ्तारी पर कानून का दायरा:
- CrPC की धारा 46(4) और अब BNSS की धारा 43(5) के अनुसार, सूर्यास्त के बाद बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के किसी महिला की गिरफ्तारी निषिद्ध है।
- हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि यह प्रतिबंध प्रत्येक स्थिति में गिरफ्तारी को अवैध नहीं बनाता।
- आपातकालीन परिस्थितियों में, विशेष रूप से जघन्य अपराधों के मामलों में, ऐसी गिरफ्तारियां आवश्यक हो सकती हैं।
- पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही:
- यदि कोई गिरफ्तारी बिना न्यायिक अनुमति के होती है, तो पुलिस अधिकारियों को अदालत में इसका स्पष्टीकरण देना आवश्यक होगा।
- यदि स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया जाता, तो संबंधित पुलिस अधिकारियों को दंडित किया जा सकता है।
निष्कर्ष
मद्रास हाई कोर्ट का यह निर्णय स्पष्ट करता है कि बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के महिलाओं की गिरफ्तारी कानून का उल्लंघन है, लेकिन इसे हमेशा अवैध नहीं माना जा सकता। असाधारण परिस्थितियों में गिरफ्तारी संभव है, लेकिन इसके लिए पुलिस अधिकारियों को उचित कारण प्रस्तुत करना होगा, अन्यथा उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
Author: संजय कुमार यादव
संवाददाता










