गढ़वा  स्थानीय जीएन कान्वेंट स्कूल गढ़वा के सभागार में संत रविदास जी की जयंती समारोह बड़े ही धूमधाम से मनाई गई।

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गढ़वा  स्थानीय जीएन कान्वेंट स्कूल गढ़वा के सभागार में संत रविदास जी की जयंती समारोह बड़े ही धूमधाम से मनाई गई।

 

कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के निदेशक सह शिक्षाविद एमपी केशरी एवं उपप्राचार्य बसंत ठाकुर के द्वारा सम्मिलित रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर तथा संत रविदास के छायाचित्र पर पुष्प व माला अर्पित कर किया गया।सभा को संबोधित करते हुए निदेशक ने कहा कि संत रविदास सनातन धर्म एवं संस्कृति के संवाहक थे। इनका पदार्पण ऐसे समय में हुआ जब समाज में कई तरह की कुरीतियां विद्यमान थी। छुआछूत, उच्च नीच, सांप्रदायिकता, जातिवाद बहुतदेव वाद, मूर्ति पूजा, बलि पूजा आदि से सभी ग्रसित थे। उन्होंने समाज को एक नई दिशा प्रदान की। भेदभाव, समरसता, समता, स्वतंत्रता और बंधुता की स्थापना कर जन-जन के लिए मिसाल कायम किया।

वे निर्गुण ब्रह्म के पक्षधर थे। वे निर्भीक, साहसिक तथा धार्मिक निष्ठा पर अडिग रहकर अपने अनुयायियों को सनातन धर्म और संस्कृति की महत्ता पर संदेश दिया। संत रविदास मूर्ति पूजा एवं पाखंड के विरोधी थे। वेदों की प्रमाणिकता के प्रबल समर्थक एवं प्रचारक थे। गृहस्थ जीवन निर्वाह करते हुए भी वे उच्च कोटि के संत थे।उनका संदेश आज भी हमारे दिलों में गूंजता है और हमें सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है। रविदास जी का जीवन हम सबों के लिए अमूल्य धरोहर है। उनका जीवन संघर्ष में रहा। हर वर्ग को समान अधिकार और सम्मान देने के वास्ते अपना जीवन अर्पित कर दिया। उनका कहना था की शिक्षा का असली उद्देश्य मात्र ज्ञान देना नहीं है बल्कि मानवता और भाईचारे की भावना का प्रसार करना है। हम सबों के लिए या आवश्यक है कि रविदास जी के महत्वपूर्ण सिद्धांतों और विचारों को अपनाते हुए लोगों तक पहुंचाएं। मंच संचालन खुर्शीद आलम जबकि धन्यवाद ज्ञापन उपप्राचार्य ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में शिक्षक संतोष प्रसाद, नीराशर्मा,वीरेंद्र शाह, कृष्ण कुमार, सरिता दुबे, नीलम कुमारी, मुकेश भारती, सुनीता कुमारी,शिवानी कुमारी, विकास Smjha, ज्योति तिवारी, रागिनी कुमारी,ऋषभ श्रीवास्तव आदि की भूमिका सराहनीय रही।

संजय कुमार यादव
Author: संजय कुमार यादव

संवाददाता

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