गैर मजरूवा भूमि से संबंधित उत्पन्न विवाद संबंधी मामलों का त्वरित निपटारा करने में सरकार उदासीन-के के यादव ।

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,गढ़वा दिनांक 27अगस्त 2025 ।
झारखंड राज्य में सभी प्रकार के गैर मजरूआ भूमि को सरकार द्वारा प्रतिबंधित किए जाने एवं रसीद निर्गत नही कीए जाने से आम जनता को काफी परेशानी एवं सरकार को भी राजस्व की भरी जाती हो रही है। कैडिस्ट्रल सर्वे C S अंग्रेजों के समय में हुआ था। इसी सर्वे में दर्ज गैरमजरूआ भूमि का स्वरूप वर्तमान में बदल चुका है ।सरकार द्वारा 1977 में राज्य के अधिकांश जिलों में रिविजनल सर्वे कराया गया है, जिसका प्रकाशन भी अधिकांश जिलों में हो चुका है। परंतु गढ़वा जिला में जब प्रकाशन हुआ तो 4- अंचलों में यथा गढ़वा, डंडा ,मेराल एवं dandai आदि का प्रकाशन अभी तक नहीं हो पाया है। इस प्रखंड के लोगों को भूमि संबंधी काफी परेशानी हो रही है। सुर्वे विभाग द्वारा गढ़वा जिले के सभी प्रखंडों का, केवल चार अंचलों को छोड़कर सर्वे का कागजात यथा, खतियान, नक्शा तथा रैयतों के नाम पर्चा आदि का वितरण कर दिया गया है ।केवल चार अंचलों में गढ़वा, डंडा ,मेराल एवं डंडे ई में अंतिम प्रकाशन नहीं होने से उक्त कागजातों का वितरण लंबित है ।इस जिले में बंदोबस्त पदाधिकारी का पदस्थापन नहीं है । इस प्रकार इस जिले में सर्वे का कार्य बिकुल बंद है। जिन प्रखंडों में प्रकाशन हुआ भी है तो वहां दफा 87 के लिए सुनवाई की समुचित ब्यवस्था नही है। इस महत्वपूर्ण विषय पर किसी भी प्रतिनिधि का ध्यान नहीं जा रहा है।
माननीय रघुवर दास जी के सरकार, भाजपा के समय तत्कालीन मुख्य सचिव श्रीमती राजबाला वर्मा जी के द्वारा राज्य के सभी जिलों से गैर मजरूवा भूमि की सूची की मांग की गई थी। तथा संदेहास्पद जमाबंदी पर सुनवाई के उपरांत जमाबंदी को रद्द करने का निर्देश भी दिया गया था। सूची भेजने में विलंब होने की स्थिति में राज्य सरकार से बार-बार समर पत्र भेजे जा रहे थे । जिला स्तर पर दबाव होने के कारण जिले के सभी अंचलों के द्वारा सभी प्रकार के गैर मजरूआ भूमि, आम ,खास, मलिक आदि की सूची आनन फानन में राज्य को भेज दिया गया। इस भूमि में वैसे भी ग़ैरमजरुआ भूमि जिसका विधिवत लगान निर्धारणन से जमाबंदी कायम हुआ है ,बंद बस्ती द्वारा प्राप्त भूमि आदि सभी गैरमजरूआ भूमि की सूची भेज दी गई ।फल स्वरुप राज सरकार द्वारा सभी गैर मजरूवा भूमि को प्रतिबंधित कर दिया गया। साथ ही ऑनलाइन रसीद जो कट रहे थे ,उसे भी बंद कर दिया गया। सरकार के इस प्रकार के निर्णय से आम जनता को काफी परेशानियों का सामना पढ़ना करना पड़ रहा है। इसमें वैसे लोग काफी परेशान है, जिनका लगन निर्धारण, बंदोंबस्ती ,आदि विधिवत हुआ है ।रसीद नहीं काटने एवं खरीद बिक्री नहीं होने से आम जन को परेशानी एवं सरकार को भी राजस्व की क्षति हो रही है। आम जानकारी के लिए मैं बताना चाहता हूं कि गैर मजरुआ G M भूमि, किसे कहते हैं? यदि नहीं जानते हैं तो जानकारी के लिए बताना चाहता हूं कि गैर आबाद भूमि को गैर मजरुआ G M भूमि कहते हैं। इसमें भी कई प्रकार की भूमि है जैसे, जी.एम. खास, बकाश्त,, जी.एम. मलिक आदि।जी.एम आम ,सार्वजनि भूमि सरकार की होती है, जिसमें तालाब, नदी ,पोखरा, सड़क आदि है, जिसे सार्वजनिक उपयोग होता है, जीसकी बंदोबस्ती किसी भी जनता के साथ नहीं हो सकती है। गैरमजरूआ खास भूमि, जमींदार द्वारा किए गए बंदोबस्त भूमि है। गैर मजरूआ मलिक भूमि, खतियान के कैफियत कॉलम में अंकित है कि दे ही रैयत बेला इजाजत मलिक के रैयत इस भूमि को जोत कोड़ करके आबाद कर सकता है ,जिसे वीआरएल एक्ट एवं ए .आर. एक्ट, 5, 6 ,7 के अंतर्गत लगान निरधारण करने का प्रावधान है ।अर्थात जिस गैर मजरूआ भूमि को जोत कर करके रैयत द्वारा आबाद कर दिया गया है, उसे अब घर गैरमजरूवा के स्थान पर रैयती मानना चाहिए ।रिविजनल सर्वे में सभी अधिकांश जी.एम. लैंड को रैयती का पर्चा निर्गत कर दिया गया है। अभी हाल ही में उच्चतम न्यायालय ,सुप्रीम कोर्ट ,द्वारा गैर मजरुआ भूमि, G M लैंड, को प्रतिबंध से हटाने एवं रसीद काटने का आदेश की जानकारी मिली है ,परंतु इस पर सरकार के स्तर से अभी तक आदेश निर्गत नहीं होने की स्थिति में स्थिति यथावत बनी है। प्राप्त सूचना से जानकारी मिली है कि सरकार द्वारा इस विषय पर अपील दायर कर दिया गया है।
यह भी विदित हो की विगत सर्वे का कार्य अंग्रेजी हुकूमत में लगभग 110 वर्ष पूर्व अर्थात 1915- 16 में किया गया था । उस समय का राजस्व कागजात यथा खतियान, नक्शा ,जिला अभिलेखागार में उपलब्ध नहीं है और न हीं आम जनता के पास है ,यदि है भी तो उसकी स्थिति जीर्ण शीर्ण हो चुकी है। कागजात के अभाव में भूमि संबंधी कार्य प्रभावित एवं पूर्णता बंद है ।अंचलों में दलालों का बोलबाला है। शहरी क्षेत्र का भी रीभीजनल सर्वे नहीं होने से भी आम जनता को परेशानी है ।सरकार जमीन से संबंधित मामलों को उलझा कर रखना चाहती है ।भूमि संबंधी मामलों का नीति स्पष्ट नहीं होने से काफी मामले न्यायालय में लंबित है। निबंधन कार्यालय में भूमि निबंधन के लिए एल.पी.सी. L P C सर्टिफिकेट जरूरी कर दिया गया है। इस प्रमाण पत्र को निर्गत करने के लिए हजारों एवं लाखों की मांग अंचल कार्यालय से की जाती है। आज बिहार में भूमि से संबंधित मामलों के लिए नए-नए प्रयोग किए जा रहे हैं ,यथा डिजिटल सर्वे, निबंध कार्य को आसान करना । निबबधित भूमिका नामांतरण आदि स्वतः करने संबंधी सुधार हुए हैं, जबकि झारखंड में सरकार के स्तर से इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
अंत में मैं सरकार एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों से आग्रह करना चाहता हूं कि गढ़वा जिला के लिए निम्न कार्यों पर आगामी विधानसभा के सत्र में रखने की आवश्यकता है, ताकि भूमि संबंधी सभी कार्य की प्रक्रिया सरल हो सके। जिले के सभी अंचलों में हो रहे भ्रस्टाचार को रोका जा सके ।सरकार भूमि संबंधी विवाद को निपटने के लिए उचित कदम उठाए। इसके लिए निम्न व्यवस्था की आवश्यकता है। 1, डिजिटल रिभीजनल सर्वे शीघ्र लागू कराई जाए ।
2 ,गढ़वा जिला के कुल चार अंचलों में यथा गढ़वा सदर ,डंडा, मैरल एवं dandai का रिविजनल सर्व को फाइनल कराया जाए।
3.
भूमि निबंधन के बाद स्वतः नामांतरण करने का निर्देश दिया जाए।
4. सभी भूमि को ऑनलाइन रसीद निर्गत कराया जाए।
5.सभी भूमि का अभिधारी खाता पुस्तिका, पासबुक बनाया जाए ।
6.भूमि सीमांकन की प्रक्रिया सरल की जाए ।
7.सभी जिलों के सर्वे कार्यालय में बंदोबस्त पदाधिकारी का तत्काल पदस्थापन सुनिश्चित कराया जाय।
8, जाति ,आय ,निवास , मृत्यु प्रमाण पत्र ,तथा जन्म प्रमाण पत्र आदि समय सीमा किया अंतर्गत निर्गत किया जाए।
धनबाद, के के यादव,अध्यक्ष
झारखंड पेंशनर समाज,गढ़वा

संजय कुमार यादव
Author: संजय कुमार यादव

संवाददाता

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