अमावस्या की तिथि पर श्री सर्वपितृ देव तर्पण महायज्ञ का आयोजन शिव मंदिर प्रांगण, बिंद टोला, छतरपुर ग्राम, गढ़वा में किया गया। जिसमें पितरों के मोक्ष प्राप्ति और पितृदोष निवारण के निमित्त तर्पण व यज्ञ किया गया।

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आज दिनांक 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या की तिथि पर श्री सर्वपितृ देव तर्पण महायज्ञ का आयोजन शिव मंदिर प्रांगण, बिंद टोला, छतरपुर ग्राम, गढ़वा में किया गया।
जिसमें पितरों के मोक्ष प्राप्ति और पितृदोष निवारण के निमित्त तर्पण व यज्ञ किया गया।

यज्ञाचार्य श्री विपिन तिवारी जी ने पितृकर्म, पितृऋण व तर्पण के अलावा गंगा अवतरण का रहस्य और महात्म्य बतलाया।
मातृका वंदन, तारक मंत्र राम का जप व स्तुति के उपरांत समस्त यजमानों ने ब्रह्माण्ड के ज्ञात, अज्ञात, विस्मृत आदि पितरों का दानरो नदी में सर्वपितृ तर्पण किया।
तत्पश्चात यज्ञाचार्य ने इक्ष्वाकु वंश के ‘भगीरथ द्वारा गंगा अवतरण’ की कथा सुनाई ।
” यज्ञाचार्य ने कहा की अनेक पीढ़ियों की लंबी तपस्या के पश्चात मां गंगा का ब्रह्मलोक से पृथ्वी पर अवतरण मनुष्य के कर्मबंधन काटने, मुक्ति और मोक्ष प्रदान कराने के लिए हुआ है।
वैसे तो गंगा खुद ही मुक्तिदायिनी है, परंतु पवित्र गंगा और गंगा रीजन में प्रवाहित नदियों में मल, मूत्र, गंदगी, औद्योगिक और श्रद्धालुओं का कचरा, प्लास्टिक, जहरीले रसायन आदि प्रवाहित करने के बाद आज प्रत्येक व्यक्ति – व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से पितृदोष से पीड़ित है।
मां गंगा की पवित्रता और अखंडता के साथ छेड़छाड़ करने से हम स्वतः ही पितृदोष से प्रभावित होते हैं।
अंत में हम सब सनातनियों की राख भी गंगा में ही प्रवाहित हो जानी है, अतः गंगा घाटी क्षेत्र में प्रवाहित सभी नदियों की दुर्दशा के भागीदार बनकर हम अपनी मुक्ति तथा आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को संकट में डाल रहे हैं।
अतः गंगा घाटी क्षेत्र की सभी नदियों को निर्मल, अविरल, स्वच्छ और निर्बाध बनाने हेतु यज्ञाचार्य ने सभी मानवों के भीतर भागीरथ चेतना का आह्वाहन किया। ”

कथा उपरांत देव,पितृ और नदियों (गंगा) के निमित्त हवन, आरती और मंगलघोष किया गया।

गंगा घाटी क्षेत्र में बहने वाली सभी नदियों को स्मरण कर उनके नाम से आहुति दी गई।
अपने भीतर भागीरथ चेतना को जागृत करके पुनः इस कलियुग में मां गंगा तथा उसकी सहायक नदियों की पवित्रता, स्वच्छता, सुरक्षा व अखंडता सुनिश्चित करने के निमित्त हम सब लोग कठोर तपस्या करेंगे, ऐसा सामूहिक संकल्प वहां उपस्थित लोगों ने किया।
यज्ञाचार्य ने कहा – मातृका पूजन का वास्तविक अर्थ भागीरथ चेतना को जागृत करके मां तत्व की सेवा करनी है। अतः नदियों को निर्मल, स्वच्छ, अखंड और पवित्र बनाए रखना ही पितृऋण से मुक्त होने का मार्ग है।

कार्यक्रम उपरांत यजमान समिति के लोगों ने मंदिर परिसर में साफ सफाई की, सेवा व वृक्षारोपण किया गया।
तत्पश्चात समस्त श्रद्धालुओं और ग्राम वासियों के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया।

पर्यावरण परिवार की ओर से शिव मंदिर छतरपुर परिसर में शमी, पारिजात, बरगद, बेल और आमला के पांच देववृक्ष लगाए गए।

कार्यक्रम में सत्कर्म यज्ञ के केंद्रीय यजमान व काशी से आए जाने माने अभिनेता श्री दिव्य प्रकाश शुक्ला ने श्री राम की स्तुति की तथा सारी मनुष्यता की ओर से गंगापुत्र के रूप में मां गंगा से क्षमा याचना की।

इस पावन अवसर पर केंद्रीय यजमान समिति के उमा पाण्डेय, महेंद्र दास, कृष्ण राजन, मनोज सिन्हा, ध्रुव पाल, सुजीत बक्सराय, महेश रंजन, दिव्य प्रकाश शुक्ला, मनीष रंजन, अरविंद जायसवाल, ओम प्रकाश गुप्ता, पवन बिंद, सिद्धार्थ ऋषि, मृत्युंजय चौबे, के अलावा यशराज, मुस्कान, पिंकी, आदि बच्चों, बुजुर्गों के अलावा बड़ी संख्या में ग्रामीण, इस दिव्य आयोजन का हिस्सा बने।

पवित्र यज्ञ का संचालन सत्कर्म यज्ञ के यज्ञाचार्य श्री विपिन तिवारी जी ने किया। आयोजक – छतरपुर यजमान समिति व समस्त ग्रामवासी, गढ़वा।

संजय कुमार यादव
Author: संजय कुमार यादव

संवाददाता

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