गढ़वा। शहर के सहिजना स्थित बाबा सोमनाथ मंदिर परिसर में शारदीय नवरात्र के अवसर पर आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर अयोध्या से पधारे कथा व्यास आचार्य रवि कृष्ण शास्त्री ने भक्ति और कर्म का मर्म समझाया।
उन्होंने कहा कि इस संसार में व्यक्ति का सम्मान उसके कर्म से होता है। परमात्मा को पाना है तो कर्म करना पड़ेगा। भगवत का अर्थ ही है – भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और पाँचों इंद्रियों पर काबू करना।
आचार्य श्री ने कहा कि संसार में परमात्मा ही सबके एक हैं। यह संसार शक्ति से चल रहा है और शक्ति देने वाली आदिशक्ति माता हैं। यह संसार शक्ति के बिना अधूरा है। जो राम नाम का आश्रय लेता है, वही सुखी है।
उन्होंने कहा कि जीवन में सत्संग की संगत होनी चाहिए। जीवन में श्रद्धा और विश्वास दोनों जरूरी हैं, इनके बिना भक्ति भी अधूरी है।
इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ राजकीय प्राथमिक विद्यालय, सहीजना के प्राचार्य दिनेश चौबे ने आचार्य श्री को माल्यार्पण कर उनका स्वागत किया, वहीं वार्ड पार्षद सत्यवती देवी ने श्रीमद्भागवत ग्रंथ पर माल्यार्पण किया। समाजसेवी अखिलेश तिवारी ने आरती की
इस अवसर पर पूजा समिति के संयोजक सूर्य प्रकाश सिंह, इंदु भूषण मिश्रा, अजीत सिंह, मिथिलेश कुमार सिन्हा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
Author: संजय कुमार यादव
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