*गढ़वा।* भगवान सबके लिए करूणानिधान हैं। भक्त भगवान से शत्रु भाव से जुड़े या प्रेम भाव से, भगवान सबका कल्याण करते हैं। उक्त बातें शहर के सहिजना स्थित बाबा सोमनाथ मंदिर पूजा समिति द्वारा शारदीय नवरात्र के अवसर पर आयोजित 9 दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस पर अयोध्या से पधारे आचार्य रवि कृष्ण शास्त्री ने प्रवचन के दौरान कही।
उन्होंने कहा कि भगवान धन के भूखे नहीं, भाव के भूखे हैं। कहा कि भगवान स्वयं कहते हैं कि मेरा भक्त मुझे केवल एक पत्र-पुष्प भी सच्चे भाव से अर्पित करे तो मैं उसी पर प्रसन्न हो जाता हूं।
आचार्य श्री ने कहा कि प्रभु की भक्ति सदैव निष्काम होनी चाहिए। निष्काम भक्ति से प्रभु शीघ्र रीझते और प्रसन्न होते हैं। निष्काम भक्ति से परमात्मा दुःख की घड़ी में सदैव भक्त के साथ रहते हैं। परमात्मा सर्वव्यापी हैं, उन्हें सब पता है कि भक्त को क्या चाहिए। इसलिए परमात्मा से केवल उनकी छत्रछाया और कृपा ही मांगनी चाहिए। अगर प्रभु की कृपा की सदैव छत्रछाया साथ रहे तो संसार की कोई वस्तु आपका अहित नहीं कर सकती।
इससे पूर्व पूजा समिति के विशाल सिंह, हेमंत दुबे, राजू दुबे ने आचार्य श्री को माल्यार्पण कर स्वागत किया। वहीं पूजा समिति के सचिव गोलू दास ने श्रीमद्भागवत ग्रंथ की आरती की, जबकि शैलेश नंदन सिन्हा ने आचार्य श्री को अंगवस्त्र प्रदान किया। मौके पर वार्ड पार्षद सत्यवती देवी, अखिलेश तिवारी, इंदु भूषण मिश्रा, सूर्य प्रकाश सिंह, प्रियांशु तिवारी, अजीत सिंह, उमेश सिंह समेत पूजा समिति के अन्य सदस्यों एवं श्रद्धालु उपस्थित थे।
Author: संजय कुमार यादव
संवाददाता










