*गढ़वा।* शहर के सहिजना स्थित बाबा सोमनाथ मंदिर पूजा पंडाल में शारदीय नवरात्र के अवसर पर आयोजित 9 दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर अयोध्या से पधारे आचार्य रवि कृष्ण शास्त्री ने एकता और संस्कार पर विशेष प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि कण-कण में परमात्मा है। यदि हम प्रत्येक व्यक्ति के अंदर, प्रत्येक प्राणी के अंदर परमात्मा को देखेंगे तो हम कभी किसी से शत्रुता नहीं करेंगे। यदि हम एकता का भाव रख लेंगे तो हमारा जीवन तृप्त हो जाएगा।
आचार्य श्री ने कहा कि हम एक रहेंगे तो कोई हमें गिरा नहीं सकता, अनेक रहेंगे तो टूट जाएंगे। इसलिए जीवन में एकता बहुत जरूरी है। मानव जीवन बड़े भाग्य से मिलता है, परमात्मा के बिना सारा संसार अधूरा है।
उन्होंने कहा कि जीवन में संस्कार अति आवश्यक है। अगर जीवन में संस्कार की प्राप्ति चाहिए तो भगवान की कथा अति आवश्यक है, क्योंकि भगवत कथा ही हमें ज्ञान और धर्म सिखाती है। कथा ही हमें सिखाती है कि अपने से श्रेष्ठ अग्रज, अतिथियों का सम्मान कैसे करना चाहिए। जीवन में अगर ज्ञान की अभिलाषा हो तो भगवान की कथा ही ज्ञान का भंडार है, क्योंकि भगवान स्वयं ज्ञान के सागर हैं। कथा के अंत में भगवान विष्णु के अवतार वामन भगवान के स्वरूप का प्रदर्शन मुहल्ले के छोटे बच्चे आशुतोष रंजन के द्वारा किया गया जिससे माहौल और भी भक्तिमय हो गया।
इससे पूर्व बाबा सोमनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष भुवनेश्वर सिंह ने श्रीमद्भागवत ग्रंथ की आरती की। साथ ही उन्होंने आचार्य श्री शास्त्री का माल्यार्पण किया। आचार्य का माल्यार्पण अभिषेक सिंह उर्फ लड्डू सिंह, सत्यनारायण चौबे, अजीत सिंह, इंदु भूषण मिश्रा, कमलेश सिन्हा, सीताराम दुबे आदि के द्वारा भी किया गया। वहीं संगीतमय श्रीमद्भागवत में वाद्य यंत्रों पर आत्मानंद ने तबला, विनय जी ने कीबोर्ड पर था विजय जी ने पैड पर संगत किया।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
Author: संजय कुमार यादव
संवाददाता









