गढ़वा में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (पीएचडी) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। विभाग की देखरेख में काम कर रहे संवेदकों द्वारा खुलेआम लापरवाही बरती जा रही है, जिससे आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि जल कनेक्शन देने के नाम पर कनेक्शनधारियों से पहले ही करीब 12 हजार रुपये तक की राशि जमा करा ली जाती है, लेकिन इसके बाद काम अधूरा छोड़ दिया जाता है। कई मामलों में संवेदक पाइपलाइन बिछाने के नाम पर केवल खानापूर्ति कर मौके से गायब हो जाते हैं।
हालात यह हैं कि कई जगहों पर सड़क पार कर पाइप तो बिछा दिया गया है, लेकिन उसे उचित गहराई में नहीं डाला गया। नियमों के अनुसार पाइप को जमीन के अंदर पर्याप्त गहराई में दबाया जाना चाहिए, लेकिन महज सतही स्तर पर पाइप डालने से वह वाहनों के दबाव में आकर फट जा रहा है। इससे जलापूर्ति बाधित हो रही है और बार-बार मरम्मत की समस्या उत्पन्न हो रही है।
ग्रामीणों और कनेक्शनधारियों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही से सरकारी धन का खुल्लम-खुल्ला दुरुपयोग हो रहा है। इसके बावजूद न तो विभागीय अधिकारी इस पर ध्यान दे रहे हैं और न ही संवेदकों पर कोई कार्रवाई की जा रही है।
लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की जांच कर दोषी अधिकारियों एवं संवेदकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके और सरकारी योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।
Author: संजय कुमार यादव
संवाददाता










