जब बिनोद पाठक ने अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली थी, उसी दिन उन्होंने संकल्प लिया था कि एक दिन गढ़वा की धरती पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन होगा। उस समय यह एक सपना था, लेकिन आज वही सपना हकीकत का रूप लेता दिखाई दे रहा है।
आज बिनोद पाठक उस संकल्प को साकार करने के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं। सम्मेलन को भव्य, ऐतिहासिक और यादगार बनाने के लिए उनका निरंतर प्रयास, समर्पण और सक्रियता देखने योग्य है।
19 एवं 20 दिसंबर 2026 गढ़वा के इतिहास में एक विशेष स्थान रखने जा रहा है। देश के विभिन्न राज्यों से स्वजातीय बंधुओं का आगमन होगा और गढ़वा की धरती सामाजिक एकता, संगठन और भाईचारे की साक्षी बनेगी।
कहते हैं कि बड़े सपने वही होते हैं, जिन्हें पूरा करने के लिए व्यक्ति अपना समय, श्रम और समर्पण लगा देता है। बिनोद पाठक जी का यह संकल्प अब सामूहिक प्रयास से साकार होने की ओर अग्रसर है।
यह केवल एक राष्ट्रीय सम्मेलन नहीं, बल्कि एक सपना, एक संकल्प और समाज की एकजुटता का उत्सव है।बिनोद पाठक जी को इस सफर में कई बार नकारात्मक विचारों, आलोचनाओं और हतोत्साहित करने वाली बातों का सामना करना पड़ा। बहुत से लोगों ने अलग-अलग तरह के नकारात्मक विचार भी रखे, लेकिन उन्होंने कभी उन बातों को अपने संकल्प पर हावी नहीं होने दिया। हर चुनौती से ऊपर उठकर वे अपने लक्ष्य की ओर निरंतर आगे बढ़ते रहे।
क्योंकि मजबूत इरादों वाले लोग आलोचनाओं से रास्ता नहीं बदलते, बल्कि अपने कर्मों से जवाब देते हैं।
गढ़वा तैयार है… इतिहास रचने के लिए! 🌹
Author: संजय कुमार यादव
संवाददाता








