गढ़वा। जिले में दशहरा का पर्व धार्मिक आस्था, उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के बाद दशमी के अवसर पर गढ़वा शहर के ऐतिहासिक मां गढ़देवी मंदिर में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
मां गढ़देवी मंदिर में प्रतिमा विसर्जन की वर्षों पुरानी परंपरा आज भी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जाती है। इस परंपरा की खासियत यह है कि श्रद्धालु मां दुर्गा की प्रतिमा को किसी वाहन पर ले जाने के बजाय अपने कंधों पर उठाकर विसर्जन स्थल तक पहुंचाते हैं। प्रतिमा को कंधे पर उठाकर विदाई देने की इस अनूठी परंपरा में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में महिला और पुरुष श्रद्धालु मंदिर परिसर पहुंचे।

इस दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। भक्त मां दुर्गा की प्रतिमा को कंधा देकर अंतिम दर्शन करने और इस पवित्र परंपरा का हिस्सा बनने के लिए उत्सुक नजर आए। पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा से परिवार, समाज और जिले की सुख-समृद्धि, शांति एवं खुशहाली की कामना की।
गढ़देवी मंदिर में प्रतिमा विसर्जन के साथ ही गढ़वा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में भी दशहरा उत्सव का पारंपरिक रूप से समापन हुआ। पूजा पंडालों में मां दुर्गा के दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं ने नम आंखों से मां को विदाई दी और अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना की।
कंधे पर प्रतिमा उठाकर विदाई देने की परंपरा बनी आकर्षण
मां गढ़देवी मंदिर में प्रतिमा को कंधे पर उठाकर विसर्जन के लिए ले जाने की परंपरा गढ़वा की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस परंपरा के माध्यम से श्रद्धालु मां के प्रति अपनी श्रद्धा और भावनात्मक जुड़ाव प्रकट करते हैं। हर वर्ष की तरह इस बार भी यह अनूठा दृश्य श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र रहा।
Author: संजय कुमार यादव
संवाददाता









