धुरकी में अवैध बालू खनन और जब्त बालू गायब होने का आरोप, CID से जांच की मांग

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राजेश विश्वकर्मा ने रांची CID को सौंपा आवेदन, अधिकारियों और बालू माफियाओं की संपत्ति जांच कराने की उठाई मांग

गढ़वा। धुरकी प्रखंड में कथित अवैध बालू खनन, भंडारण और जब्त बालू के गायब होने का मामला अब CID तक पहुंच गया है। इस मामले में राजेश विश्वकर्मा ने 2 नवंबर 2026 को अपराध अनुसंधान विभाग (CID), रांची को लिखित आवेदन सौंपकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

आवेदन में आरोप लगाया गया है कि धुरकी प्रखंड के विभिन्न वन क्षेत्रों में बिना निविदा के अवैध रूप से बालू का खनन कर करीब 4 लाख 70 हजार सीएफटी बालू का भंडारण किया गया था। इस संबंध में पूर्व में गढ़वा के तत्कालीन उपायुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा से शिकायत की गई थी। शिकायत के बाद जांच कमेटी गठित की गई थी। आवेदनकर्ता के अनुसार, जांच में विभिन्न बालू घाटों पर बालू का भंडारण होने की पुष्टि हुई थी।

इसके बाद उपायुक्त के निर्देश पर विभिन्न घाटों से बालू का उठाव कर धुरकी प्रखंड कार्यालय परिसर में जमा कराया गया था। हालांकि, आवेदन में इस प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि जब्त बालू के उठाव एवं भंडारण में भी कथित रूप से बालू माफियाओं की भूमिका रही थी।

बालू गायब होने और बेचने का आरोप

आवेदनकर्ता ने आरोप लगाया है कि विभिन्न घाटों पर भंडारित शेष बालू को कुछ ही दिनों के अंदर कथित रूप से अधिकारियों और बालू माफियाओं की मिलीभगत से बेच दिया गया। वहीं, कुछ बालू को वन भूमि में बने गड्ढों में भरवा दिया गया। इस मामले के सामने आने के बाद कुछ बालू माफियाओं के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई थी।

अनुसंधान प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल

राजेश विश्वकर्मा ने दर्ज प्राथमिकी के अनुसंधान पर भी सवाल उठाते हुए आशंका जताई है कि कथित मिलीभगत के कारण जांच प्रभावित हो सकती है। उन्होंने मामले के अनुसंधान में किसी प्रकार की छेड़छाड़ की आशंका व्यक्त करते हुए इसकी जांच किसी सक्षम उच्चस्तरीय एजेंसी से कराने की मांग की है।

संपत्ति की जांच और कार्रवाई की मांग

CID को सौंपे गए आवेदन में राजेश विश्वकर्मा ने पूरे प्रकरण में कथित रूप से शामिल अधिकारियों, पदाधिकारियों और बालू माफियाओं की संपत्ति की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि अवैध खनन से लेकर बालू के भंडारण, उठाव और गायब होने तक की पूरी प्रक्रिया की जांच कर दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

आवेदन के साथ समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों एवं वीडियो न्यूज की छायाप्रति भी संलग्न किए जाने की बात कही गई है। फिलहाल आवेदन में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में संबंधित अधिकारियों का पक्ष और CID की ओर से जांच संबंधी आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।

संजय कुमार यादव
Author: संजय कुमार यादव

संवाददाता

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