महाविद्यालय की बदहाली और प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ फूटा छात्रों का गुस्सा: झारखंड छात्र मोर्चा ने की तालाबंदी

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गढ़वा नामधारी महाविद्यालय, गढ़वा में झारखंड छात्र मोर्चा के नेतृत्व में सैकड़ों आक्रोशित छात्रों ने कॉलेज की बदहाल स्थिति और प्रशासन की गहरी नींद के खिलाफ मजबूरन मुख्य गेट पर तालाबंदी कर दी और उग्र धरना-प्रदर्शन किया। दर्जनों बार ज्ञापन सौंपने, शांतिपूर्ण धरने और पुतला दहन के बावजूद जब प्रशासन की कानों पर जूं नहीं रेंगी, तो छात्रों को सड़क पर उतरने के लिए बाध्य होना पड़ा। छात्रों का साफ कहना है कि जब तक कॉलेज प्रशासन उनकी 8 सूत्रीय मांगों पर समझौता और स्पष्ट समय-सीमा नहीं देता, तब तक यह तालाबंदी और आंदोलन अनवरत जारी रहेगा।छात्रों ने कहा की कॉलेज में सालों-साल लेट चल रहे शैक्षणिक सत्रों के कारण विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। ग्रेजुएशन की डिग्रियां समय पर न मिलने से युवाओं के करियर के कीमती वर्ष बर्बाद हो रहे हैं, इसलिए छात्र मांग कर रहे हैं कि सत्रों को पटरी पर लाने के लिए विश्वविद्यालय और कॉलेज प्रशासन तुरंत परीक्षा और रिजल्ट का एक निश्चित और पारदर्शी कैलेंडर जारी करे। इसके साथ ही, राष्ट्रीय शिक्षा नीति यानी NEP के बहाने इस कॉलेज में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई को बंद कर दिया गया है, जिसे छात्र स्थानीय और गरीब विद्यार्थियों के साथ एक बड़ा अन्याय मान रहे हैं। पीजी की पढ़ाई बंद होने से जिले के छात्र उच्च शिक्षा से वंचित हो रहे हैं या उन्हें मजबूरन जिला छोड़कर बाहर जाना पड़ रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा और इसे बिना किसी देरी के तुरंत बहाल करना होगा।

निवर्तमान जिला अध्यक्ष निशांत चतुर्वेदी गढ़वा के छात्रों के भविष्य के साथ यह खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। महाविद्यालय में शैक्षणिक सत्र सालों-साल लेट चल रहे हैं, जिससे युवाओं के करियर के कीमती साल बर्बाद हो रहे हैं। हमारी पहली मांग है कि परीक्षा और रिजल्ट का एक निश्चित कैलेंडर तुरंत जारी किया जाए। इसके साथ ही, NEP के बहाने पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) की पढ़ाई बंद करना स्थानीय और गरीब छात्रों के साथ घोर अन्याय है। हम उच्च शिक्षा के लिए अपने छात्रों को जिला छोड़ने पर मजबूर नहीं होने देंगे। प्रशासन को आज ही इस पर लिखित जवाब देना होगा, अन्यथा आंदोलन और उग्र होगा।”
निवर्तमान जिला कोषाध्यक्ष सूरज तिवारी नामधारी महाविद्यालय में पिछले 17 वर्षों से B.Sc. (CAPP), IT और BBA जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक चल रहे थे। लेकिन प्रशासन ने बिना किसी पारदर्शी सूचना के IT पाठ्यक्रम को बंद कर दिया और इसे IPS जैसे संस्थान का Study Centre बनाने की साजिश रची जा रही है। पूर्व में प्राचार्य महोदय ने इस पर एक सप्ताह में लिखित स्पष्टीकरण देने का आश्वासन दिया था, जो आज तक अधूरा है। सत्र 2026-2029 के नामांकन और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ हम नहीं होने देंगे। छात्र मोर्चा का स्पष्ट कहना है कि सत्र 2026-2029 के नामांकन और विद्यार्थियों के भविष्य के साथ इस प्रकार का कोई भी गुप्त खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन को स्टडी सेंटर बनाए जाने से संबंधित सभी आधिकारिक आदेशों और विश्वविद्यालय की स्वीकृति के दस्तावेजों को तुरंत सार्वजनिक करना होगा।
वरिष्ठ छात्र नेता शशांक चौबे ने कहा की कॉलेज का भवन आज खंडहर में तब्दील हो चुका है, जहाँ छात्र-छात्राएं डर के साए में बैठने को मजबूर हैं। परिसर से मूलभूत सुविधाएं जैसे साफ पीने का पानी और चालू शौचालय पूरी तरह गायब हैं। इसके अलावा, छात्रों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए खेल मैदान की स्थिति दयनीय है। हमारी मांग है कि भवन की मरम्मत के लिए तुरंत बजट आवंटित हो, बुनियादी सुविधाएं बहाल की जाएं और खिलाड़ियों के लिए स्पोर्ट्स किट व खेल सामग्री तुरंत उपलब्ध कराई जाए। बुनियादी हक के लिए भी तालाबंदी करनी पड़े, यह कॉलेज प्रशासन के लिए शर्म की बात है।
छात्र नेताओं ने संयुक्त रूप से चेतावनी दी है कि यह तालाबंदी इस बात का प्रमाण है कि छात्र अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। यदि प्रशासन आज ही अपनी ठोस कार्ययोजना और समय-सीमा लिखित रूप में स्पष्ट नहीं करता है, तो यह अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन जारी रहेगा। इससे उत्पन्न होने वाली किसी भी कानून-व्यवस्था या प्रशासनिक गतिरोध की संपूर्ण जिम्मेदारी कॉलेज प्रशासन की होगी।
गढ़वा अँचल पदाधिकारी दल-बल के साथ नामधारी महाविद्यालय पहुंचे। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आंदोलनकारी छात्रों और कॉलेज प्रशासन के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई। उन्होंने छात्र नेताओं और कॉलेज प्रबंधन को एक साथ बिठाकर हर एक मांग पर बेहद गंभीर और विस्तृत चर्चा की। पदाधिकारी की पहल पर कॉलेज प्रशासन और आंदोलनकारी छात्रों के बीच सभी आठ सूत्रीय मांगों पर एक ठोस सहमति बनी, जिसके बाद सभी पक्षों की मौजूदगी में एक आधिकार समझौता पत्र तैयार किया गया। कॉलेज प्रशासन ने छात्रों की मांगों को समय-सीमा के भीतर पूरा करने का छठ पूजा तक ठीक करने का भरोसा दिया। इस समझौते और प्रशासनिक आश्वासन के बाद, झारखंड छात्र मोर्चा के नेतृत्व में प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने अपनी जीत की घोषणा की और मुख्य द्वार पर की गई तालाबंदी को खोलकर धरने को समाप्त कर दिया। छात्र मोर्चा ने स्पष्ट किया कि यदि इस समझौते की शर्तों का पालन समय पर नहीं हुआ, तो छात्र पुनः आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। मौके पर विश्वविद्यालय कोषाध्यक्ष कुमार शुभेंद्र निवर्तमान जिला सचिव विकास चंद्रवंशी, शुभम कुमार ,शुभम दुबे, विक्की रोशन, आदित्य कुमार, सौरभ सिंह, प्रमोद कुमार, राजकुमार सिंह, अरुण कुमार, मुकेश कुमार, धीरज कुमार, आनंद कुमार, मंटू कुमार, राहुल, अवनीश, नीतीश यादव सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

संजय कुमार यादव
Author: संजय कुमार यादव

संवाददाता

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