टंडवा पीपा पुल के श्रेय को लेकर सियासत तेज, संतोष केसरी ने उठाए सवाल

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पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर की पहल का हवाला देकर नगर परिषद प्रत्याशी ने कहा- जनता को पुल चाहिए, श्रेय की राजनीति नहीं

गढ़वा। गढ़वा शहर के टंडवा में प्रस्तावित पीपा पुल के निर्माण को लेकर राजनीतिक श्रेय लेने की होड़ शुरू हो गई है। इस मामले में नगर परिषद प्रत्याशी संतोष केसरी ने तीखा बयान जारी करते हुए कहा है कि टंडवा पीपा पुल के निर्माण की पहल सबसे पहले पूर्व विधायक एवं झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर ने की थी। इसके बावजूद अब कुछ लोग इस विकास कार्य का श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं।

संतोष केसरी ने कहा कि “माल महाराज के, मिर्जा खेले होली” वाली कहावत टंडवा पीपा पुल के मामले में पूरी तरह चरितार्थ होती दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि गढ़वा की जनता के सामने वास्तविक तथ्यों को रखना जरूरी है, ताकि विकास कार्यों को लेकर किसी प्रकार का भ्रम न फैले।

उन्होंने बताया कि दिनांक 3 अगस्त 2026 को पूर्व मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर ने गढ़वा के उपायुक्त को पत्र लिखकर टंडवा में पीपा पुल निर्माण की मांग की थी। पत्र में टंडवा क्षेत्र की माताओं-बहनों, बच्चों, आम नागरिकों और व्यवसायियों को नदी पार करने में होने वाली परेशानियों का उल्लेख किया गया था। विशेषकर बरसात के दिनों में नदी पार करने में होने वाली कठिनाइयों को देखते हुए पीपा पुल निर्माण को जनहित में आवश्यक बताया गया था।

संतोष केसरी के अनुसार, पूर्व मंत्री ने जिला प्रशासन से जिला के अनावद्ध फंड अथवा किसी अन्य उपयुक्त मद से पुल निर्माण कराने का अनुरोध किया था।

उन्होंने आरोप लगाया कि जब जिला प्रशासन के अनावद्ध फंड से पीपा पुल निर्माण की पहल धरातल पर उतरने लगी, तो कुछ लोगों ने अक्टूबर महीने में उपायुक्त को पत्र देकर इस कार्य का श्रेय लेने की कोशिश शुरू कर दी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इस जनहित के कार्य के लिए सबसे पहले लिखित पहल की गई थी, तो बाद में सामने आने वाले दावों के आधार पर श्रेय लेने का क्या औचित्य है?

उपायुक्त से वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग

संतोष केसरी ने गढ़वा उपायुक्त से आग्रह किया कि इस पूरे मामले में संबंधित पत्रों की तिथि और दस्तावेजों को ध्यान में रखते हुए जनता के सामने वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए।

उन्होंने कहा कि यदि जिला प्रशासन के अनावद्ध फंड से नगर परिषद क्षेत्र में कोई विकास कार्य कराया जाता है और उसका क्रियान्वयन नगर परिषद के माध्यम से होता है, तो इसका यह अर्थ नहीं है कि योजना की मूल पहल भी नगर परिषद ने ही की थी।

उन्होंने कहा कि फंड जिला प्रशासन का है, स्वीकृति जिला प्रशासन की है और जिस जनप्रतिनिधि ने सबसे पहले जनता की समस्या को उठाकर उसके समाधान के लिए लिखित पहल की, उसके योगदान को भी सम्मान मिलना चाहिए।

विकास कार्यों पर राजनीति नहीं, जनता को सुविधा मिले

संतोष केसरी ने कहा कि विपक्ष की भूमिका में रहते हुए उनका दायित्व है कि जनता के हित में होने वाले अच्छे कार्यों का स्वागत करें। लेकिन जहां किसी दूसरे की पहल का श्रेय लेने की कोशिश हो, वहां सच्चाई को जनता के सामने रखना भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि टंडवा पीपा पुल का निर्माण गढ़वा की जनता के लिए दीपावली का महत्वपूर्ण उपहार है। इसके लिए पूर्व मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर की पहल और जिला प्रशासन की सकारात्मक भूमिका, दोनों का सम्मान होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि विकास कार्य किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं होते, लेकिन विकास के लिए जिसने सबसे पहले आवाज उठाई, उसके योगदान को मिटाया भी नहीं जाना चाहिए।

संतोष केसरी ने अपने बयान के साथ 3 अगस्त 2026 को पूर्व मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर द्वारा उपायुक्त को दिए गए मांग-पत्र को सार्वजनिक करने की बात कही।

उन्होंने अंत में कहा कि गढ़वा की जनता सब जानती है और दस्तावेजों को भी समझती है। श्रेय की राजनीति छोड़कर जनता के हित में काम करना चाहिए। गढ़वा की जनता को पुल चाहिए, राजनीतिक श्रेय लेने की प्रतियोगिता नहीं।

संजय कुमार यादव
Author: संजय कुमार यादव

संवाददाता

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