गाढवा “हौसले मजबूत हों, तो हर मुश्किल छोटी लगती है।” इस कहावत को पूरी तरह सच साबित कर दिखाया है भारत के स्टार पैरा बोशिया खिलाड़ी अजेय राज ने। अपनी दिव्यांगता को कभी अपनी राह का रोड़ा न बनने देने वाले अजेय राज ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा फहराकर न केवल अपने गांव, जिले और राज्य, बल्कि पूरे देश का नाम दुनिया भर में रोशन किया है।
हाल ही में चेक रिपब्लिक के पिल्सन शहर में आयोजित ‘वर्ल्ड बोशिया चैलेंजर 2026’ में अजेय राज और उनकी जोड़ीदार अंजलि ठाकुर ने BC3 पेयर्स कैटेगरी में इतिहास रचते हुए स्वर्ण पदक (Gold Medal) अपने नाम किया।
15 सितंबर 2026 (मंगलवार) को खेले गए फाइनल मुकाबले में भारतीय जोड़ी ने स्पेन जैसी मजबूत टीम को करारी शिकस्त दी। पोडियम पर स्वर्ण पदक प्राप्त करने के बाद गूंजे “भारत माता की जय” के नारों ने हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया।
कराटे से बोशिया तक: कभी न टूटने वाला हौसला
अजेय राज का जज्बा शुरू से ही अद्भुत रहा है। दिव्यांगता से पूर्व, उन्होंने रांची (झारखंड) में पढ़ाई के दौरान कराटे (खेल जगत) में अपने स्कूल और क्षेत्र का नाम रोशन किया था। खेल में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन को देखते हुए झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री श्री बाबूलाल मरांडी द्वारा उनकी पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति की घोषणा भी की गई थी। हालांकि, कुदरत ने उनके लिए एक अलग राह चुनी, जिस पर आगे बढ़ते हुए आज वे देश के शीर्ष एथलीटों में शुमार हैं।
“हमारा दिमाग और उनका शरीर”: जीत के पीछे की कहानी
चंडीगढ़ स्पाइनल रिहैब सेंटर से जुड़े अजेय राज अपनी सफलता का श्रेय अपने रैंप ऑपरेटर संदीप कुमार और अंजलि के ऑपरेटर प्रियंका को भी देते हैं। अजेय राज ने बताया, “रैंप ऑपरेटर के बिना हम कुछ नहीं हैं। इस खेल में हमारा दिमाग काम करता है और उनका शरीर। वे भी इस मेडल के उतने ही बराबर हकदार हैं।”
इसके साथ ही, अजेय राज ने हिमाचल प्रदेश (मंडी) की रहने वाली अंजलि ठाकुर के रिहैबिलिटेशन के दौरान मार्गदर्शन किया और उन्हें बोशिया खेल से जोड़कर अंतरराष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बनाया।
एशियाई खेलों पर अब अगली नजर वर्ल्ड बोशिया चैलेंजर में तिरंगा लहराने के बाद अजेय राज का अगला लक्ष्य आगामी एशियाई पैरा गेम्स (Para Asian Games) हैं, जहाँ वे देश के लिए एक बार फिर गोल्ड मेडल जीतने के इरादे से जल्द ही तैयारी शुरू करने जा रहे हैं। अजेय राज का यह सफर देश के लाखों युवाओं और दिव्यांगजनों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
Author: संजय कुमार यादव
संवाददाता










